विशेष समाचार
बापू का बड़प्पन
उन दिनों की बात है जब महात्मा गाँधी आगा खां पैलेस में कैद थे। उस महल को ही जेल का रूप दे दिया गया था। एक दिन जब गांधीजी सोकर उठे तो उन्होंने महसूस किया कि आज कुछ ज्यादा ही चहल - पहल हो रही है। उन्होंने कस्तूरबा से पूछा - आज क्या बात है ? कोई गुपचुप तैयारी चल रही है क्या ? कस्तूरबा ने कहा - मुझे तो कुछ पता नहीं , ये लोग क्या कर रहे हैं। पर कुछ खास बात है जरूर। यह सुनकर गांधीजी हँसे और बोले - तुमको सब पता है। उन सबको समझा दो कि वे अति उत्साह में कोई कार्यक्रम न बना लें। बिल्कुल साधारण ढंग से सब काम होना चाहिए। दरअसल उस दिन दो अक्टूबर था।
डॉ . सुशीला नैयर , मीरा बहन आदि बापू का जन्म-दिन कुछ अलग अंदाज़ में मनाने की तैयारी कर रही थीं। तभी गांधीजी को किसी ने बताया कि उन्हें जन्मदिन की बधाई देने के लिए जिले के कलेक्टर भी आने वाले हैं।
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