कविता मानवता की उच्चतम अनुभूति की अभिव्यक्ति है। - हजारी प्रसाद द्विवेदी।

Find Us On:

English Hindi
Loading

वो था सुभाष, वो था सुभाष

 (काव्य) 
 
रचनाकार:

 रोहित कुमार 'हैप्पी'

वो भी तो ख़ुश रह सकता था
महलों और चौबारों में।
उसको लेकिन क्या लेना था,
तख्तों-ताज-मीनारों से!
         वो था सुभाष, वो था सुभाष!

अपनी माँ बंधन में थी जब,
कैसे वो सुख से रह पाता!
रण-देवी के चरणों में फिर
क्यों ना जाकर शीश चढ़ाता?
      अपना सुभाष, अपना सुभाष!

डाल बदन पर मोटी खाकी,
क्यों न दुश्मन से भिड़ जाता!
'जय-हिन्द' का नारा देकर
क्यों न अजर-अमर हो जाता!
       नेता सुभाष, नेता सुभाष!

जीवन अपना दाव लगाकर
दुश्मन सारे खूब छिकाकर
कहाँ गया वो, कहाँ गया वो?
जीवन-संगी सब बिसराकर,
          तेरा सुभाष, मेरा सुभाष!

मैं तुमको आज़ादी दूंगा
लेकिन उसका मोल भी लूंगा।
खूं बदले आज़ादी दूंगा
बोलो सब तैयार हो क्या?
      गरजा सुभाष, बरसा सुभाष!

वो था सुभाष, अपना सुभाष!
नेता सुभाष, बाबू सुभाष!
तेरा सुभाष, मेरा सुभाष!
    अपना सुभाष, अपना सुभाष!

- रोहित कुमार 'हैप्पी'

 

Back

 

Comment using facebook

 
Post Comment
 
Name:
Email:
Content:
Type a word in English and press SPACE to transliterate.
Press CTRL+G to switch between English and the Hindi language.
 
 

सब्स्क्रिप्शन

इस अंक में

 

इस अंक की समग्र सामग्री पढ़ें

 

 

सम्पर्क करें

आपका नाम
ई-मेल
संदेश