साहित्य की उन्नति के लिए सभाओं और पुस्तकालयों की अत्यंत आवश्यकता है। - महामहो. पं. सकलनारायण शर्मा।

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मेजबान

 (कथा-कहानी) 
 
रचनाकार:

 खलील जिब्रान

'कभी हमारे घर को भी पवित्र करो' करूणा से भीगे स्वर में भेड़िये ने भोली-भाली भेड़ से कहा

'मैं जरूर आती बशर्ते तुम्हारे घर का मतलब तुम्हारा पेट न होता' भेड़ ने नम्रतापूर्वक जवाब दिया

- खलील जिब्रान

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