वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं। - मैथिलीशरण गुप्त।

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किसे नहीं है बोलो ग़म

 (बाल-साहित्य ) 
 
रचनाकार:

 रोहित कुमार 'हैप्पी'

साँसों में है जब तक दम
किसे नहीं है बोलो ग़म!

हँस-हँस यूं तो बोल रहे हो
पर आँखें हैं क्योकर नम !

उठो, इरादे करो बुलंद
तूफ़ाँ भी जाएँगे थम !

चट्टानों से रखो इरादे
तुम्हें डिगा दे किसमें दम!

कितनी भी बाधाएं आएं
आत्म-शक्ति हो न कम!

उदय हो रहा सूरज देखो
कहाँ बचेगा बोलो तम !

- रोहित कुमार 'हैप्पी'

 

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