कविता मानवता की उच्चतम अनुभूति की अभिव्यक्ति है। - हजारी प्रसाद द्विवेदी।

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अकाल और उसके बाद

 (काव्य) 
 
रचनाकार:

 नागार्जुन | Nagarjuna

कई दिनों तक चूल्हा रोया चक्की रही उदास‚
कई दिनों तक कानी कुतिया सोई उसके पास
कई दिनों तह लगी भीत पर छिपकलियों की गश्त‚
कही दिनों तक चूहों की भी हालत रही शिकस्त।

दाने आये घर के अंदर बहुत दिनों के बाद‚
धुंआं उठा आंगन से ऊपर बहुत दिनों के बाद‚
चमक उठीं घर भर की आंखें बहुत दिनों के बाद‚
कौए नें खुजलाई पांखें बहुत दिनों के बाद।

- नागार्जुन

 

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