समस्त भारतीय भाषाओं के लिए यदि कोई एक लिपि आवश्यक हो तो वह देवनागरी ही हो सकती है। - (जस्टिस) कृष्णस्वामी अय्यर

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भगत सिंह - गीत

 (काव्य) 
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 भारत-दर्शन संकलन | Collections

फांसी का झूला झूल गया मर्दाना भगत सिंह ।
दुनियां को सबक दे गया मस्ताना भगत सिंह ।।
फांसी का झूला......


राजगुरु से शिक्षा लो दुनिया के नवयुवको ।
सुखदेव को पूछो कहां मस्ताना भगत सिंह ।।
फांसी का झूला......


रोशन कहां, अशफाक और लहरी, कहां बिसमिल ।
आजाद से था सच्चा दोस्ताना भगत सिंह ।।
फांसी का झूला......


स्वागत को वहां देवगण में इन्द्र के होंगे ।
परियां भी गाती होंगी यह तराना भगत सिंह ।।
फांसी का झूला......


दुनियां को हरएक चीज को हम भूल क्यूं न जायें ।
भूले न मगर दिल से मुस्कराना भगत सिंह ।।
फांसी का झूला......


भारत के पत्ते पत्ते में सोने से लिखेगा ।
राजगुरु, सुखदेव और मस्ताना भगत सिंह ।।
फांसी ।


ऐ हिन्दियों सुनलो जरा हिम्मत करो दिल में।
बनना पड़ेगा सबको अब दीवाना भगत सिंह ।।
फांसी का झूला......


- अज्ञात

[ शहीदों की यादगारी से ]

 

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