जिस देश को अपनी भाषा और अपने साहित्य के गौरव का अनुभव नहीं है, वह उन्नत नहीं हो सकता। - देशरत्न डॉ. राजेन्द्रप्रसाद।

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मछली की समझाइश‌

 (बाल-साहित्य ) 
 
रचनाकार:

 प्रभुद‌याल‌ श्रीवास्त‌व‌

मेंढक बोला चलो सड़क पर.
जोरों से टर्रायें|
बादल सोया ओढ़ तानकर.
उसको शीघ्र जगायें

मछली बोली पहले तो हम.
लोगों को समझायें|
"पेड़ काटना बंद करें वे.
पर्यावरण बचायें|

- प्रभुदयाल श्रीवास्तव

 

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