जिस देश को अपनी भाषा और अपने साहित्य के गौरव का अनुभव नहीं है, वह उन्नत नहीं हो सकता। - देशरत्न डॉ. राजेन्द्रप्रसाद।

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भूगोल | लघु-कथा

 (कथा-कहानी) 
 
रचनाकार:

 चंद्रधर शर्मा गुलेरी | Chandradhar Sharma Guleri

एक शिक्षक को अपने इंस्पेक्टर के दौरे का भय हुआ और वह क्लास को भूगोल रटाने लगा। कहने लगा कि पृथ्वी गोल है । यदि इंस्पेक्टर पूछे कि पृथ्वी का आकार कैसा है और तुम्हें याद न हो तो मैं सुंघनी की डिबिया दिखाऊंगा, उसे देखकर उत्तर देना। गुरु जी की डिबिया गोल थी ।

इंस्पेक्टर ने आकर वही प्रश्न एक विद्यार्थी से किया और उसने बड़ी उत्कंठा से की ओर देखा । गुरु ने जेब में से चौकोर डिबिया निकाली । भूल से दूसरी डिबिया आई थी । लड़का बोला, "बुधवार को पृथ्वी चौकौर होती है और बाकी सब दिन गोल ।"

-गुलेरी

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