दक्षिण की हिंदी विरोधी नीति वास्तव में दक्षिण की नहीं, बल्कि कुछ अंग्रेजी भक्तों की नीति है। - के.सी. सारंगमठ

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होली व फाग के दोहे

 (काव्य) 
 
रचनाकार:

 रोहित कुमार 'हैप्पी'

भर दीजे गर हो सके, जीवन अंदर रंग।
वरना तो बेकार है, होली का हुड़दंग॥

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अभी तलक छोड़ी नहीं, दिल से उसने जंग।
यूं होली को आ गया, मुख पर मलने रंग ॥

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अपना गुस्सा छोड़िए, आओ खेलें संग ।
देखो अंबर में उड़े, हैं होली के रंग ॥

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बिन तेरे लगता हमें, जीवन ये बेरंग।
चाहे पिचकारी चले, चाहे उड़ते रंग ॥

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सबको कर काहे रहे, तुम होली में तंग।
घोट-घोट के पी रहे, देखो कैसे भंग ॥

- रोहित कुमार 'हैप्पी'

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