हिंदी ही भारत की राष्ट्रभाषा हो सकती है। - वी. कृष्णस्वामी अय्यर

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सरकार का जादू : जादू की सरकार

 (विविध) 
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रचनाकार:

 शरद जोशी | Sharad Joshi

जादूगर मंच पर आकर खड़ा हो गया। वह एयर इंडिया के राजा की तरह झुका और बोला, ''देवियो और सज्जनो, हम जो प्रोग्राम आपके सामने पेश करने जा रहे हैं, वह इस मुलुक का, इस देश का प्रोग्राम है जो बरसों से चल रहा है और मशहूर है। आप इसे देखिए और हमें अपना आशीर्वाद दीजिए।" इतना कहकर जादूगर ने झटके से सिर उठाया और जोरदार पाश्र्व संगीत बजने लगा।

''फर्स्ट आयटम ऑफ दि प्रोग्राम : अप्लीकेशन टू द गवर्नमेंट, सरकार कू दरखास्त!" जादूगर ने कहा और बायां हाथ विंग्स की तरफ उठाया कि दो लड़कियां वहां से निकलीं। उनके हाथों में स्टूल और बंद डिब्बे थे। एक डिब्बे पर लिखा था आवक और दूसरे पर जावक। लड़कियों ने जादूगर के दोनों ओर स्टूल रख दिए, उन पर डिब्बे जमा दिए और पीछे खड़ी हो उस आश्चर्यमिश्रित मुस्कराहट से देखने लगीं जैसे जादूगर की सहायिकाएं देखती हैं। जादूगर ने सबको दिखाया कि डिब्बे खाली हैं।

''सरकार कू दरखास्त! आवक का डिब्बा में दरखास डालेंगा तो जावक का डिब्बा में जवाब मिलेंगा। मिलेंगा तो मिलेंगा आदरवाइज नइ भी मिलेंगा। अप्लाय अप्लाय नो रिप्लाय।" जादूगर ने कहा और तभी विंग्स से एक व्यक्ति अनेक आवेदन-पत्र लेकर आया और उसने जादूगर के हाथों में थमा दिए। जादूगर ने दर्शकों की तरफ देखा और कहा, ''आरे आज बहुत सारा दरखाश है। हाम इसकू गोवरमैंट को भेजता है, ''इतना कहकर उसने आवक के डिब्बे में एक-एक कर आवेदन पत्र डालने शुरू कर दिए। फिर डिब्बे को बंद कर दिया। यह सारा काम उसने पाश्र्व संगीत की एक लहर के साथ किया। उसने डिब्बे को बंद किया और जादू की छड़ी घुमाई। फिर आवेदन पत्र लाने वाले से बोला, ''तुम इदर काय कू खड़ा है?"

''अप्लीकेशन का जवाब मांगता है सर!"

''ओ, आवक में दरखास डालेंगा तो जावक में जवाब आएंगा। इधर देखो।"

वह व्यक्ति जावक का डिब्बा देखता है। वह भी खाली है।

''ओय, गोवरमेंट ने जुवाब नईं दिया। इधर आवक में देखो, फारवर्ड हुआ कि नईं?"

आवक के डिब्बे से भी सारे आवेदन पत्र गायब हो चुके हैं।

''सारा आप्लीकेशन किदर गिया?"

''किदर गिया?"

''किदर गिया?"

''किदर गिया?"

जादूगर और आवेदन करने वाले के चेहरे पर हैरानी-परेशानी के नकली भाव हैं।

कोई बात नईं फिर से अप्लाय करो। नया दरखास लगाओ।" जादूगर बोला।

वह व्यक्ति अंदर जाकर फिर कुछ आवेदन पत्र ले आया। जादूगर ने उसे सबको दिखाकर आवक के डिब्बे में बंद किया, छड़ी घुमाई। फिर डिब्बा खोला तो सारे आवेदन पत्र गायब थे। फिर उसने जावक की दाहिने हाथ की ओर रखा डिब्बा खोला और देखा कि सारे आवेदन पत्र आवक से गायब होकर जावक में आ गए थे, मगर उन सब पर अब 'रिजेक्ट" लिखा हुआ था। जादूगर ने सारे आवेदन पत्र उस व्यक्ति को लौटा दिए।

''ये साब आप्लकेशन तो रिजेक्ट हो गिया।" व्यक्ति ने करुण स्वर से कहा।

''क्या बताएंगा, इंडिया गवरमेंट, गरीब का आप्लीकेशन रिजेक्ट नईं होएंगा तो क्या होएंगा।" जादूगर हंस कर बोला।

दूसरा व्यक्ति सिर लटका कर जाने लगा। जादूगर ने उसे बुलाया और कान में एक बात कही। वह व्यक्ति तेजी से अंदर गया, कुछ आवेदन पत्र, पिन की डिबिया और नोट की गड्डी लेकर आ गया। उसने हर आवेदन पत्र से पिन लगाकर कुछ नोट नत्थी किए और जादूगर को दिए। जादूगर ने उन्हें आवक के डिब्बे में रखा और छड़ी घुमाई। डिब्बे को खोला, आवेदन पत्र गायब थे। दूसरा जावक का डिब्बा खोला, आवेदन सारे वहां आ गए थे, मगर उनसे रुपयों के सारे नोट निकल चुके थे। लेकिन इस बार सारे आवेदन पर लिखा था 'सेंक्शन"।

''कांग्रेचुलेशंस, तोमारा सारा आप्लीकेशन सेंक्शन हो गिया।" जादूगर ने कहा और दर्शकों की ओर नम्र मुद्रा में झुका। दर्शकों ने तालियां बजाईं। जादूगर बोला, ''आप्लीकेशन टू द गोवरमेंट, सरकार कू दरखास्त!" और संगीत जोर से बजने लगा। लड़कियों ने स्टूल और डिब्बे उठाए और अंदर चली गईं। वह व्यक्ति भी चला गया।

''नेक्स्ट आयटम ऑफ दि प्रोग्राम: करप्शन ऑफ इंडिया-भारत में भ्रष्टाचार।" जादूगर ने घोषणा की और वह मंच के दाहिने कोने पर आया, जहां एक छोटी टेबल पर रुपयों से भरी एक थैली रखी थी। जादूगर ने थैली उलटाई और रुपए नीचे रखे डिब्बे में गिरने लगे।

'ये करप्शन की, भ्रष्टाचार की थैली है भाई साहब, इसका रुपया कभी खत्म नहीं होगा। थैली पर नजर रखिए साहिबान, इसका रुपैय्या कभी खत्म नहीं होगा।" इतना कहने के बाद जादूगर ने उस थैली से, जिसमें से सारे रुपए निकल चुके थे, नए सिरे से उतने ही और रुपए निकाल कर दिखा दिए तथा थैली वहीं रख दी।

''करप्शन कभी खत्म नहीं होंगा, थैली कभी खाली नहीं होंगी। थैली पर नजर रखिए साहिबान।" जादूगर बोला, झुका और उसने घोषणा की-'नेक्स्ट आयटम ऑफ द प्रोग्राम: टूरिज्म इन इंडिया- भारत की सैर।"

संगीत जोर से बजने लगा। लड़कियां इस बार मंदिर के आकार का हल्की लकड़ी का ढांचा उठाकर लाईं, जिसके चारों दरवाजों पर रंगीन पर्दे लगे हुए थे और एक व्यक्ति उसमें सीधा खड़ा हो सकता था। जादूगर ने पर्दे हटाकर दर्शकों को बताया कि मंदिर खाली है। तभी गोरी चमड़ी का एक सूट-बूटधारी शख्स सूटकेस ले विंग्स से आया।

'गुड इवनिंग सर, क्या मांगता है?" जादूगर ने उससे पूछा।
'इंडिया विजिट करना मांगता है।"

'वेल्कम, वेल्कम, सुवागत है आपका।"

जादूगर ने झुककर कहा और मंदिर का एक पर्दा हटा दिया। विदेशी व्यक्ति उसमें प्रवेश कर गया। जादूगर ने पर्दा गिरा जादू की लकड़ी घुमाई। विदेशी बाहर आया। उसके हाथ में सूटकेस नहीं था।
'सर, आपका सूटकेस किदर गया?" जादूगर ने पूछा।

''बनारस में चोरी हो गया।"

''वैरी सॉरी सर।" कहकर जादूगर ने मंदिर का दूसरा पर्दा उठा दिया। विदेशी अंदर घुसा। जादूगर ने पर्दा डाल जादू की लकड़ी घुमाई, विदेशी फिर बाहर निकला। इस बार उसके बदन पर कोट नहीं था।

''सर, आपका कोट किदर गया?" जादूगर ने पूछा।

''आगरा में बेचकर होटल का बिल पेमेंट किया।"

''वेरी गुड सर।" जादूगर ने मंदिर का तीसरा पर्दा उठाया और विदेशी फिर अंदर घुस गया। जादूगर ने छड़ी घुमाई और इस बार जब विदेशी बाहर आया तो वह सिर्फ एक पतलून पहने था।
''आपका कोमीज किदर गया सर?"

''तुम्हारा इंडिया का एक होलीमैन साधु ने हमसे ले लिया।"

''वेरी फाइन सर।" जादूगर ने कहा और मंदिर का चौथा पर्दा उठाया। इस बार जब विदेशी मंदिर से बाहर निकला, उसके शरीर पर पतलून भी नहीं था और वह 'विजिट इंडिया" का पोस्टर लपेटे हुए था।

''वेरी सॉरी सर, आपका पतलून किदर गया?"

''उसकू बेचकर हमने अपना कंट्री रिटर्न होने का टिकट खरीद लिया।"

''गुड बाई सर, विजिट इंडिया अगेन, फेर को तोशरीफ लाइए।"

विदेशी व्यक्ति पोस्टर से बदन लपेटे विंग्स में चला जाता है। लड़कियां मंदिर के सारे पर्दे उठाकर बताती हैं कि सूटकेस या उसके कपड़े आदि वहां नहीं हैं। जादूगर नम्र मुद्रा में झुकता है। दर्शक तालियां बजाते हैं।

''नेक्स्ट आइटम: करप्शन ऑफ इंडिया-भारत में भ्रष्टाचार।" की घोषणा करता हुआ फिर उस थैली के पास पहुंचता है, जिसे वह खाली कर आया था। भ्रष्टाचार की खाली थैली भर गई है अब तक। जादूगर उसे उलटाता है, रुपया निकल कर नीचे डिब्बे में गिरता है।

''भ्रष्टाचार कभी खत्म नईं होएंगा साहेब, थैली कभी खाली नहीं होएंगा। थैली पर नजर रखिए साहिबान।" जादूगर कहता है। और अपनी जगह लौटकर नए कार्यक्रम की घोषणा करता है-'फारेन पॉलिसी: अमारा विदेशी नीति।" लड़कियां स्टूल पर एक लकड़ी का बड़ा सा डिब्बा रख देती है। जादूगर दर्शकों को बताता है कि डिब्बा सब तरफ से खुलता है।

''ये फॉरेन पॉलिसी-विदेशी नीति है साहिबान, डिब्बा सब बाजू से खुलता है। इस बाजू से अमरीका से बात करेंगा। इस बाजू से रूस से बात करेंगा। इदर से इंग्लैंड से बात करेंगा। इदर से फ्रांस से बात करेंगा। डिब्बा सब बाजू से खुलता है।" जादूगर डिब्बा बंद कर देता है। फिर कहता है, 'साहिबान ये हमारा फॉरेन पॉलिसी है। अब हम देखेंगा कि उसमें क्या-क्या है?"-वह जादू की लकड़ी घुमाता है, डिब्बे को खोलता है और उसमें से कबूतर निकालता है।

''कबूतर, पीस डोव, शांति का पाखी। हमारा कंट्री सबसे पीस चाहता है।" जादूगर फिर डिब्बे में हाथ डालता है और एक कटोरा निकालता है। दर्शकों को बताकर कहता है, ''ये फॉरेन एड-विदेश की मदद का कटोरा है साहिबान।" वह कटोरा लड़की को देता है और बोलता है, ''अमरीका का वास्ते," फिर डिब्बे में हाथ डालकर एक और कटोरा निकालता है- ''रूस का वास्ते" फिर एक और कटोरा-''कनाडा का वास्ते" फिर एक और -''फ्रांस का वास्ते" और इसी तरह वह देशों का नाम लेता जाता है और विदेश नीति के उस छोटे से खाली डिब्बे से सहायता के लिए कटोरे निकलते जाते हैं।
दर्शक तालियां बजा रहे हैं, कटोरे निकलते जा रहे हैं।

''नेक्स्ट आयटम ऑफ द प्रोग्राम: इकॉनोमिक्स ऑफ इंडिया-भारत का अर्थशास्त्र।" जादूगर ने कहा और लड़कियों ने उसकी दोनों ओर दो बड़े टेबुल रखे, जिन पर दो बड़े डिब्बे रखे गए। एक पर लिखा था: सार्वजनिक क्षेत्र और दूसरे पर निजी क्षेत्र। दोनों डिब्बे खोलकर दिखाए गए। वे खाली थे। लड़कियां दो मुर्गियां लेकर आईं। जादूगर ने एक मुर्गी सार्वजनिक और दूसरी निजी क्षेत्र के डिब्बे में रखी। जादू की लकड़ी घुमाई और सबसे पहले निजी क्षेत्र का डिब्बा खोला। मुर्गी बाहर आई और उसके बाद जादूगर ने दस ताजे अंडे निकाल कर दिखाए। दर्शकों ने तालियां बजाईं। उसके बाद जादूगर ने सार्वजनिक क्षेत्र का डिब्बा खोला। वहां से मुर्गी भी गायब थी। और कुछ नुचे हुए पंख मिले।

''आय, अंडा मिलना तो दूर इदर पब्लिक सेक्टर का मुर्गी भी साफ हो गिया।" जादूगर ने इस बार पांच अंडे सार्वजनिक क्षेत्र के और पांच अंडे निजी क्षेत्र के डिब्बे में रखे। डिब्बों को बंद किया और जादू की लकड़ी घुमाई। डिब्बों को खोला तो निजी क्षेत्र के पांच अंडे गायब थे, मगर उनकी जगह पांच चूजे बाहर आए। सार्वजनिक क्षेत्र के डिब्बे से पांच अंडे गायब थे, लेकिन चूजा नहीं निकला।
''कैसा है पब्लिक सेक्टर साहिबान, मुर्गी भी गायब हो गया, अंडा रखा तो अंडा भी गायब हो गिया। थोड़ा जांच-इन्कवायरी करना होगा।" जादूगर मंच से उतरा। सामने की पंक्ति में बैठे एक मिनिस्टर साहब की जेब से एक अंडा निकाल कर दिखाया। कुछ दूर एक आईएएस अधिकारी बैठे थे, उनकी नाक से अंडा टपकाकर निकाला। थोड़ी दूर पर एक ट्रेड यूनियन नेता बैठा था। उनकी टोपी उठाकर एक अंडा उसमें से निकाला। एक अंडा इंजीनियर की बगल से निकाला और एक अंडा बाबू की जेब से निकाला।

''ये वो पांच अंडा है साहिबान जो पब्लिक सेक्टर से गायब हो गिया था। हाम नहीं पकड़ता तो साब उसका आमलेट बनाकर खा जाता।" जादूगर ने कहा और दर्शकों ने तालियां बजाईं।
नेक्स्ट आयटम ऑफ द प्रोगाम: करप्शन ऑफ इंडिया-भारत में भ्रष्टाचार। थैली पर नजर रखिए साहिबान। यह करप्शन का थैली है। इसका रुपया कभी कम नहीं होता।" जादूगर ने मंच के कोने पर रखी थैली को फिर उलटा और उससे रुपया निकलने लगा।

''करप्शन कभी खत्म नहीं होएंगा साहिबान।" जादूगर ने कहा और नई घोषणा की, 'स्मगलर्स पैरेडाइज-तस्करों का स्वर्ग।" लड़की ने जादूगर के हाथ में एक थैला दिया। जादूगर ने दर्शकों को बताया कि वह खाली है। तभी विंग्स से पुलिस की पोशाक में एक व्यक्ति दाखिल हुआ।
''ऐ, थैले में क्या है? स्मगल का सामान?" पुलिस वाले ने पूछा।

''कुछ नहीं है हवलदार साहिब।" जादूगर ने खाली थैला दिखा दिया।

पुलिसवाला चला गया। दूसरी ओर से एक व्यक्ति ने प्रवेश किया।

जादूगर ने पूछा, ''स्मगल का माल खरीदेंगा साब, वॉच-घोड़ी, सेंवटीन ज्वेल, नॉयलान, सूटपीस, ब्लेड, जो मांगेंगा हम देंगा।" और फिर जादूगर ने उसी खाली थैले से घडिय़ां निकाल कर देना शुरू कर दिया। हर बार वह हाथ डालता और घडिय़ां निकालता। खरीदने वाला उन्हें लेता जाता। पुलिस वाला फिर आया। जादूगर ने दिखा दिया कि थैला खाली है। वह चला गया। वह जादूगर तस्करी का और सामान थैले से निकाल कर देने लगा। नॉयलान का थान, टेपरिकार्डर, कैमरे, रेजर आदि। पुलिस वाला फिर आता है। जादूगर खाली झोला दिखा देता है। पुलिसवाला जाने लगता है। जादूगर उसे आवाज देकर बुलाता है और उसी झोले से एक घड़ी निकालकर पुलिसवाले को भी दे देता है। वह पहनता हुआ खुश-खुश चला जाता है। जनता तालियां बजा रही है। जादूगर 'करप्शन ऑफ इंडिया-भारत में भ्रष्टाचार" को फिर दोहराता है।

''करप्शन कभी खत्म नईं होंगा साहिबान, थैली पर नजर रखिए।"

नया कार्यक्रम था- ''निपोटिज्म-भतीजावाद!"

मंच पर एक जवान लड़का आता है। जादूगर पूछता है, तुम कौन हो। लड़का बताता है कि वह मंत्री महोदय का भतीजा है। जादूगर उसे एक टेबल पर लिटा देता है।

''देखिए साहिबान, हमारे मुलुक में भतीजावाद कैसे ऊपर उठता है। वह बिना कुछ किए ऊपर उठता है। कोई साधारण आदमी उतना ऊपर नहीं उठ सकता, जितना भतीजा उठता है।" जादूगर छड़ी घुमाता है और टेबल पर सीधे लेटा हुआ भतीजा धीरे-धीरे ऊपर उठने लगता है। वह अधर में स्थापित हो जाता है।

जनता तालियां बजाती हैं। जादूगर नम्रता से झुकता है।
''नेक्स्ट आयटम ऑफ द प्रोग्राम: डेमोक्रेसी इन इंडिया-भारत में प्रजातंत्र।"

तेल के ड्रम या शराब के पीपे के आकार की बड़ी कोठियां मंच पर रख दी जाती हैं, जिनमें एक व्यक्ति चाहे तो पूरा छुप सके। हर ड्रम पर एक राजनीतिक दल का नाम लिखा हुआ है। एक नेता मंच पर आता है।

''आपका तारीफ?" जादूगर पूछता है।

''हम लीडर हैं- नेता!"

''कौन से दल का नेता?"

''जिसका मेजोरिटी हो उसका नेता?"

जादूगर नेता को एक ड्रम में उतार देता है, ढक्कन रख देता है और जादू की लकड़ी घुमाता है। नेता एक दूसरे ही ड्रम से बाहर निकलता है।

''हॉय! यह तुम क्या किया?"

''हम दलबदल किया।"

नेता फिर उस ड्रम में छुप जाता है। जादूगर लकड़ी घुमाता है। नेता इस बार फिर नए ड्रम से प्रकट होता है।


दर्शक तालियां बजाते हैं। वे आश्चर्य में हैं कि एक जगह घुसा नेता दूसरी जगह फिर कैसे निकल आता है। जादूगर झुककर बोलता है, ''डेमेक्रेसी इन इंडिया-भारत में प्रजातंत्र!"

जादूगर आखिरी जादू दिखाता है- ''गरीब का पेट।"

मंच पर एक यंत्र लगाया जाता है। बिजली से चलने वाला आरा, जो हर चीज काट देता है। मंच पर मैले कपड़े पहने गरीब-सा दुबला-पतला व्यक्ति आता है। जादूगर उसे टेबल पर लिटा देता है और आदर्शवादी भाषणों से हिप्नोटाइज कर देता है। यंत्र चालू होता है, आरा पेट पर है, पेट कटने लगता है, कट जाता है।


''यह यंत्र हमारे देश का बना यंत्र है साहिबान और यह गरीब का पेट है, जिसे यह यंत्र काट रहा है।"

लोग स्तब्ध हैं, फिर तालियां बजाने लगते हैं।

''पिछले तेईस साल से हम यह जादू देश में हर जगह दिखा रहे हैं, हमें आशीर्वाद दीजिए, देवियो और सज्जनो कि हम आपकी खिदमत में पेश होते रहें और ऐसे ही जादू दिखा कर मुल्क का नाम ऊंचा करें। जय हिंद!"

जादूगर नम्र अदा से झुकता है। तालियां बजती रहती हैं।

- शरद जोशी

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