भाषा ही राष्ट्र का जीवन है। - पुरुषोत्तमदास टंडन।

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ज्ञानप्रकाश विवेक की ग़ज़लें

 (काव्य) 
 
रचनाकार:

 ज्ञानप्रकाश विवेक | Gyanprakash Vivek

प्रस्तुत हैं ज्ञानप्रकाश विवेक की ग़ज़लें !

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