वही भाषा जीवित और जाग्रत रह सकती है जो जनता का ठीक-ठीक प्रतिनिधित्व कर सके। - पीर मुहम्मद मूनिस।

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कृष्ण सुकुमार की ग़ज़लें

 (काव्य) 
 
रचनाकार:

 कृष्ण सुकुमार | Krishna Sukumar

कृष्ण सुकुमार की ग़ज़लें

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