हिंदी और नागरी का प्रचार तथा विकास कोई भी रोक नहीं सकता'। - गोविन्दवल्लभ पंत।

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हम भी काट रहे बनवास

 (काव्य) 
 
रचनाकार:

 रोहित कुमार 'हैप्पी' | न्यूज़ीलैंड

हम भी काट रहे बनवास
जावेंगे अयोध्या नहीं आस

पडूं रावण पर कैसे मैं भारी
नहीं लक्ष्मण भी है मेरे पास

यहाँ रावण-विभीषण हैं साथ
करूं लँका का कैसे मैं नास

कौन फूँकेगा सोने की लँका
यहाँ है कहाँ हनुमन-सा दास

सीया बैठी है कितनी उदास
राम आवेंगे है उसको आस

- रोहित कुमार 'हैप्पी'

 

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