अकबर से लेकर औरंगजेब तक मुगलों ने जिस देशभाषा का स्वागत किया वह ब्रजभाषा थी, न कि उर्दू। -रामचंद्र शुक्ल

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स्कूल में लग जाये ताला | बाल कविता

 (बाल-साहित्य ) 
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रचनाकार:

 जयप्रकाश मानस | Jaiprakash Manas

अब से ऐसा ही हो जाये
भले किसी को पसंद न आये ...

स्कूल में लग जाये ताला
दें बस्तों को देश निकाला
होमवर्क जुर्म घोषित हो,
कोई परीक्षा ले न पाये ...

दिन भर केवल खेलें खेल
जो डाँटे उसको हो जेल
खट्टा-मीठा खारा-तीता,
जो चाहे जैसा वह खाये ...

हरदम चले हमारी सत्ता
हो दिल्ली चाहे कलकत्ता
हम मालिक अपनी मर्जी के,
हर गलती माँ-बाप को भाये ...

मौसी-मामी, नाना-नानी
रोज सुनायें नयी कहानी
हम पंछी हैं, हम तितली हैं,
गीत हमारा ही जग गाये ...

अब से ऐसा ही हो जाये
भले किसी को पंसद न आये ...

- जयप्रकाश मानस

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