हिंदी और नागरी का प्रचार तथा विकास कोई भी रोक नहीं सकता'। - गोविन्दवल्लभ पंत।

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हाइकु - रोहित कुमार हैप्पी (काव्य) 
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रचनाकार: रोहित कुमार 'हैप्पी'

हाइकु


दोस्त है कृष्ण
तुम हर्जाना भरो
सुदामा बन!

#

राम बनना
डरना मत कभी
बनवास से!

#

हाथ थमाया
वो अपना बनाया
हाथ है, ना वो

#

चीर-हरण..
आँखें ढूंढ रही हैं...
कहाँ हो कृष्ण?

#

है मधुमास
आंखे गंगा-जमुना
सीया उदास

#

भूख-बेकारी
बड़े-बड़े सपने
सामने बैंक

#

नशे में धुत्त
मंडे टू संडे - रोज
वो समदर्शी

#

बैंक बैलेस
कोठी, बंगला, कार
उड़े हैं बाल

#

है सप्ताहांत
पार्टी...डिस्को...खिसको
ये अभिमन्यु

#

पेड़ पे काग
शायद कोई आया
डाकिया-बिल

#

होंठ हैं चुप्प
रात अंधरी घुप्प
नयना बोले

#

होली, दीवाली
दिल है खाली-खाली
ये है विदेस

#

आँखों में नमी
बेगाना कोई घर
कहाँ है अम्मी

#

बूढ़ा शरीर
कुछ ताजे सपने
टूटा है दिल

- रोहित कुमार

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