देशभाषा की उन्नति से ही देशोन्नति होती है। - सुधाकर द्विवेदी।

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 (काव्य) 
 
रचनाकार:

 रोहित कुमार 'हैप्पी'

कुछ खून से बने हुए
कुछ आप हैं चुने हुए
और कुछ...
हमने बचाए हुए हैं
टूटने-बिखरने को हैं..
बस यूं समझो..
दीवार पर टंगें कैलंडर की तरह,
सजाए हुए हैं।

#

- रोहित कुमार 'हैप्पी'
  संपादक, भारत-दर्शन
  न्यूज़ीलैंड


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