हिंदी को तुरंत शिक्षा का माध्यम बनाइये। - बेरिस कल्यएव

इसलिए तनहा खड़ा है

 (काव्य) 
Print this  
रचनाकार:

 राजगोपाल सिंह

इसलिए तनहा खड़ा है
है अभी उसमें अना है

बिन बिके जो लिख रहा है
हममें वो सबसे बड़ा है

भीड़ से बिल्कुल अलग है
आज भी वो सोचता है

ख़ून दौड़े है रग़ों में
जब कभी वो बोलता है

कल उसी पर शोध होंगे
आज जो अज्ञात-सा है

-राजगोपाल सिंह

 

Back
 
Post Comment
 
 

सब्स्क्रिप्शन

इस अंक में

 

इस अंक की समग्र सामग्री पढ़ें

 

 

सम्पर्क करें