हिंदी भाषा के लिये मेरा प्रेम सब हिंदी प्रेमी जानते हैं। - महात्मा गांधी।

मुर्गे जी महाराज

 (बाल-साहित्य ) 
Print this  
रचनाकार:

 सुभाष मुनेश्वर | न्यूज़ीलैंड

सुबह उठे कि दिये बाँग
मुर्गे जी महाराज
आप जगे औरों को जगाये
कर ऊंची आवाज।

फट-फट-फट फिर कुकररूँ कूँ
ज़ोरों से गोहराये
एक नहीं पर सब मुर्गे
अपनी आवाज उठायें।

बाँग दिये फिर चले ढूँढने
इधर-उधर अनाज
मुर्गी बच्चों की टोली में
मुर्गे जी महाराज।

-सुभाष मुनेश्वर, वैलिंगटन
 न्यूज़ीलैंड
 ई-मेल : smuneshwar@gmail.com

 

Back
 
Post Comment
 
 

सब्स्क्रिप्शन

इस अंक में

 

इस अंक की समग्र सामग्री पढ़ें

 

 

सम्पर्क करें