यदि स्वदेशाभिमान सीखना है तो मछली से जो स्वदेश (पानी) के लिये तड़प तड़प कर जान दे देती है। - सुभाषचंद्र बसु।

हैरान परेशान, ये हिन्दोस्तान है

 (काव्य) 
Print this  
रचनाकार:

 अनिल जोशी | Anil Joshi

हैरान परेशान, ये हिन्दोस्तान है
ये होंठ तो अपने हैं, पर किसकी जुबान है

जुगनू मना रहे हैं जश्न, आप देखिए
पर सोचिए सूरज यहां क्यों बेजुबान है

तुलसी, कबीर, मीरा भी, जब से हुए हैं 'कौन'
पूछा किए कि क्या यही हिन्दोस्तान है

बौने से शख्स ने कहा यूं आसमान से
आती है अंग्रेजी उसे, वो आसमान है

रिश्तों की नजाकत यहां पर खत्म हो गई
हर शख्स इस बाजार में बस इक सामान है

हंस कर कहा मैकाले ने, कल हमसे जब मिला
तलवार तुम्हारी है, पर किसकी म्यान है

- अनिल जोशी
  उपाध्यक्ष, केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल
  शिक्षा मंत्रालय, भारत

 

Back
 
Post Comment
 
 

सब्स्क्रिप्शन

इस अंक में

 

इस अंक की समग्र सामग्री पढ़ें

 

 

सम्पर्क करें