हिंदी के पुराने साहित्य का पुनरुद्धार प्रत्येक साहित्यिक का पुनीत कर्तव्य है। - पीताम्बरदत्त बड़थ्वाल।

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स्वयं से

 (काव्य) 
 
रचनाकार:

 रोहित कुमार 'हैप्पी'

आजकल
तुम
धीमा बोलने लगी
या
मुझे
सुनाई देने लगा
कम?

आजकल
तुम्हारी आवाज
सुनाई नहीं देती!

कहते हैं-
आत्मा
दिखाई नहीं देती।

- रोहित कुमार ‘हैप्पी'

 

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