अहिंदी भाषा-भाषी प्रांतों के लोग भी सरलता से टूटी-फूटी हिंदी बोलकर अपना काम चला लेते हैं। - अनंतशयनम् आयंगार।

Find Us On:

English Hindi
Loading

बन्दर मामा

 (बाल-साहित्य ) 
 
रचनाकार:

 डा रामनिवास मानव | Dr Ramniwas Manav

पहन नया कुर्ता-पजामा,
निकले घर से बन्दर मामा।
चले जा रहे रौब दिखाते,
पैर पटकते, गाल फुलाते।

कहा किसी ने नेताजी हैं,
अजी नहीं, अभिनेता ही हैं।
नाम सदाचारी है इनका
काम अदाकारी है इनका।

रंग बदलने में ये माहिर,
रूप बदले में जग-जाहिर।
गांधी-भक्त कहाते हैं ये,
देश लूटकर खाते हैं ये।

सुनसुनकर ये तीखी बातें,
सो न सके वह कितनी रातें।
अब तो मैं कुर्ता-पजामा,
कभी न पहनूं बोले मामा।

--डॉ रामनिवास मानव

 

Back

 

Comment using facebook

 
Post Comment
 
Name:
Email:
Content:
Type a word in English and press SPACE to transliterate.
Press CTRL+G to switch between English and the Hindi language.
 
 

सब्स्क्रिप्शन

Captcha Code

इस अंक में

 

इस अंक की समग्र सामग्री पढ़ें

 

 

सम्पर्क करें

आपका नाम
ई-मेल
संदेश