यदि स्वदेशाभिमान सीखना है तो मछली से जो स्वदेश (पानी) के लिये तड़प तड़प कर जान दे देती है। - सुभाषचंद्र बसु।

उलाहना

 (कथा-कहानी) 
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रचनाकार:

 सआदत हसन मंटो | Saadat Hasan Manto

"देखो यार। तुम ने ब्लैक मार्केट के दाम भी लिए और ऐसा रद्दी पेट्रोल दिया कि एक दुकान भी न जली।"

--मंटो

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