जिस देश को अपनी भाषा और अपने साहित्य के गौरव का अनुभव नहीं है, वह उन्नत नहीं हो सकता। - देशरत्न डॉ. राजेन्द्रप्रसाद।

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मुक़ाबला

 (काव्य) 
 
रचनाकार:

 रोहित कुमार 'हैप्पी'

दमदार ने
पूरे दम से
जान लड़ा दी
मंज़िल पाने को,

और...
दुमदार ने केवल दुम हिला दी
मंज़िल हथियाने को।

- रोहित कुमार 'हैप्पी'

 

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