राष्ट्रभाषा के बिना राष्ट्र गूँगा है। - महात्मा गाँधी।

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अद्भुत संवाद

 (विविध) 
 
रचनाकार:

 भारतेन्दु हरिश्चन्द्र | Bharatendu Harishchandra

"ए, जरा हमारा घोड़ा तो पकड़े रहो।"
"यह कूदेगा तो नहीं?"
"कूदेगा! भला कूदेगा क्यों? लो संभालो। "
"यह काटता है?"
"नहीं काटेगा, लगाम पकड़े रहो।"
"क्या इसे दो आदमी पकड़ते हैं तब सम्हलता है?"
"नहीं !"
"फिर हमें क्यों तकलीफ देते हैं? आप तो हई हैं।"

- भारतेन्दु हरिश्चन्द्र

 

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