राष्ट्रभाषा हिंदी का किसी क्षेत्रीय भाषा से कोई संघर्ष नहीं है।' - अनंत गोपाल शेवड़े

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विडम्बना

 (काव्य) 
 
रचनाकार:

 संजय भारद्वाज

ऐसा लबालब
क्यों भर दिया तूने,
बोलता हूँ तो
चर्चा होती है,
चुप रहता हूँ तो
और भी अधिक
चर्चा होती है!

संजय भारद्वाज, पुणे
ई-मेल: writersanjay@gmail.com

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