मैं महाराष्ट्री हूँ, परंतु हिंदी के विषय में मुझे उतना ही अभिमान है जितना किसी हिंदी भाषी को हो सकता है। - माधवराव सप्रे।

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उदयभानु ‘हंस' के हाइकु

 (काव्य) 
 
रचनाकार:

 उदयभानु हंस | Uday Bhanu Hans

युवक जागो!
अपना देश छोड़
यूँ मत भागो!

#

नारी-जीवन --
कभी मिले सिन्दूर
कभी तन्दूर।

#

सब हैरान
क्रिकेट का खेल है 
सोने की खान!

#

गुप्त व्यापार
प्रकट हो जाए तो
है भ्रष्टाचार।

#

तुम स्वतन्त्र
फिल्मी गानों को सुनों
या वेदमन्त्र।

-डॉ. उदयभानु ‘हंस'

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