भारतेंदु और द्विवेदी ने हिंदी की जड़ पाताल तक पहुँचा दी है; उसे उखाड़ने का जो दुस्साहस करेगा वह निश्चय ही भूकंपध्वस्त होगा।' - शिवपूजन सहाय।

Find Us On:

English Hindi
Loading

जीवन और संसार पर दोहे

 (काव्य) 
 
रचनाकार:

 रोहित कुमार 'हैप्पी'

आँखों से बहने लगी, गंगा-जमुना साथ ।
माँ ने पूछा हाल जो, सर पर रख कर हाथ ।।

जिस्मों में तो जां नहीं, न चेहरों पर रंग ।
देख जवानी आज की, हुआ बुढ़ापा दंग ।।

जीवन को समझा नहीं, ‘रोहित' यह संसार ।
यह जीवन तो मौत ने, हमको दिया उधार ।।

जीवन में करने लगे, ‘रोहित' सभी दुकान ।
मोल-भाव में खो गया, हर इक का ईमान ।।

राँझा तो राँझा नहीं, मिले कहाँ से हीर ।
अब दिल में बसती नहीं, मीरा वाली पीर ।।

तेरा-मेरा कर रहा, ‘रोहित' यह संसार ।
चार दिनों की जिंदगी, आठ दिनों का बैर ।।

- रोहित कुमार ‘हैप्पी'

 

Back

 

Comment using facebook

 
Post Comment
 
Name:
Email:
Content:
Type a word in English and press SPACE to transliterate.
Press CTRL+G to switch between English and the Hindi language.
 
 

सब्स्क्रिप्शन

इस अंक में

 

इस अंक की समग्र सामग्री पढ़ें

 

 

सम्पर्क करें

आपका नाम
ई-मेल
संदेश