परमात्मा से प्रार्थना है कि हिंदी का मार्ग निष्कंटक करें। - हरगोविंद सिंह।

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आज के दोहे  (काव्य) 
   
Author:रोहित कुमार 'हैप्पी'

हमने चुप्पी तान ली, नहीं करेंगे जंग ।
फिर भी दुनिया ना हटे, करती रहती तंग ।। 

तेरे मेरे रास्ते,  हैं बिल्कुल ही भिन्न ।
तू ‘जी-जी' करता रहे, मुझको इस से घिन्न ।।

हम को समझ न आ सके, इक-दूजे की बात ।
तुम व्यापारी हो भले,  मैं लेखक की जात ।।

ऑंखें अपनी मींच ले, मुँह से बोल न बोल ।
रिश्तों का अब तो यहाँ, यही बचा है मोल ।।

मैं तो मरजी जो करूँ, तुझे नहीं अधिकार ।
मुँह पर ताला डाल ले, बचा रहेगा प्यार ।।

‘रोहित' इस संसार में, किसको किससे प्रेम ।
हर कोई अब खेलता, अपनी-अपनी ‘गेम' ।।


- रोहित कुमार ‘हैप्पी'
  दिसंबर, २०१७

 

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