राष्ट्रभाषा के बिना आजादी बेकार है। - अवनींद्रकुमार विद्यालंकार

Find Us On:

English Hindi
Loading
मेंहदी से तस्वीर खींच ली  (काव्य)  Click To download this content
   
Author:म‌ाखनलाल चतुर्वेदी

मेंहदी से तस्वीर खींच ली किसकी मधुर! हथेली पर ।

प्राणों की लाली-सी है यह, मिट मत जाय
हाथों में रसदान किये यह, छुट मत जाय
यह बिगड़ी पहचान कहीं कुछ बन मत जाय
रूठन फिसलन से मन चाही मन मत जाय!

बेच न दो विश्वास-साँस को, उस मुस्कान अधेली पर!
मेंहदी से तस्वीर खींच ली किसकी मधुर! हथेली पर ।

हाथों पर लिख रक्खा है क्या सौदा आँख-मिचौनी का?
आँखों में भर लायी हो क्या रस? आहत अनहोनी का?
क्या बाजी पर चढ़ा दिये ये विमल गोद के धन आली?
क्या कहलाने लगा जगत में हर माली ही वनमाली?

तुम्हें याद कर रहा प्राणधन उस झिड़कन अलबेली पर ।
मेंहदी से तस्वीर खींच ली किसकी मधुर! हथेली पर ।

-माखनलाल चतुर्वेदी

Previous Page  | Index Page  |    Next Page

Comment using facebook

 
Post Comment
 
Name:
Email:
Content:
Type a word in English and press SPACE to transliterate.
Press CTRL+G to switch between English and the Hindi language.
 
 
 

सब्स्क्रिप्शन

सर्वेक्षण

भारत-दर्शन का नया रूप-रंग आपको कैसा लगा?

अच्छा लगा
अच्छा नही लगा
पता नहीं
आप किस देश से हैं?

यहाँ क्लिक करके परिणाम देखें

इस अंक में

 

इस अंक की समग्र सामग्री पढ़ें

 

 

सम्पर्क करें

आपका नाम
ई-मेल
संदेश