भाषा का निर्माण सेक्रेटरियट में नहीं होता, भाषा गढ़ी जाती है जनता की जिह्वा पर। - रामवृक्ष बेनीपुरी।

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कुछ झूठ बोलना सीखो कविता! (काव्य) 
   
Author:जयप्रकाश मानस | Jaiprakash Manas

कविते!
कुछ फरेब करना सिखाओ कुछ चुप रहना
वरना तुम्हारे कदमों पर चलनेवाला कवि मार दिया जाएगा खामखां
महत्वपूर्ण यह भी नहीं कि तुम उसे जीवन देती हो

अमरत्व भी
पर मरने के बाद

कविता फिलहाल उसे
तुम जरा-सा झूठ दे दो
ताकि किसी तरह वह बच जाए

जब बचा ही नहीं रहेगा कवि
तो कविता के साथ कौन आना पसंद करेगा!

- जयप्रकाश मानस

[साभार - अबोले के विरुद्ध]

 

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