पराधीनता की विजय से स्वाधीनता की पराजय सहस्रगुना अच्छी है। - अज्ञात।

Find Us On:

English Hindi
Loading
मंकी और डंकी  (बाल-साहित्य ) 
   
Author:आनन्द विश्वास (Anand Vishvas)


डंकी के ऊपर चढ़ बैठा,
जम्प लगाकर मंकी, लाल।
ढेंचूँ - ढेंचूँ करता डंकी,
उसका हाल हुआ बेहाल।

पूँछ पकड़ता कभी खींचता,
कभी पकड़कर खींचे कान।
कैसी अज़ब मुसीबत आई,
डंकी हुआ बहुत हैरान।

बड़े जोर से डंकी बोला,
ढेंचूँ - ढेंचूँ , ढेंचूँ - ढेंचूँ।
खों - खों करके मंकी पूछे,
किसको खेंचूँ, कितना खेंचूँ।

डंकी जी ने सोची युक्ति,
लोट लगाकर जड़ी दुलत्ती,
खीं-खीं करता मंकी भागा,
टूट गई उसकी बत्तीसी।

-आनन्द विश्वास

 

Previous Page  |  Index Page  |   Next Page

Comment using facebook

 
Post Comment
 
Name:
Email:
Content:
Type a word in English and press SPACE to transliterate.
Press CTRL+G to switch between English and the Hindi language.
 
 
 

सब्स्क्रिप्शन

Captcha Code

इस अंक में

 

इस अंक की समग्र सामग्री पढ़ें