राष्ट्रभाषा के बिना आजादी बेकार है। - अवनींद्रकुमार विद्यालंकार।

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एक ऐसी भी घड़ी आती है / ग़ज़ल (काव्य)  Click To download this content
   
Author:रोहित कुमार 'हैप्पी'

एक ऐसी भी घड़ी आती है
जिस्म से रूह बिछुड़ जाती है

अब यहाँ कैसे रोशनी होती
ना कोई दीया, ना बाती है

हो लिखी जिनके मुकद्दर में ख़िज़ाँ
कोई रितु उन्हें ना भाती है

ना कोई रूत ना भाये है मौसम
चांदनी रात दिल दुखाती है

एक अर्से से खुद में खोए हो
याद किसकी तुम्हें सताती है

 

Posted By Krishna Mohan   on Saturday, 16-Feb-2013-07:17
कृपया मुझे भारत के बारे में और जानकारी प्रदान कीजिये मैं आपका बहुत बहुत आभारी रहूँगा!!!!!!!
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