वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं। - मैथिलीशरण गुप्त।

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श्रमिक हाइकु (काव्य) 
   
Author:रोहित कुमार 'हैप्पी'

ये मज़दूर
कितने मजबूर
घर से दूर!

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करता श्रम
आएंगे अच्छे दिन
पाले है भ्रम!

- रोहित कुमार 'हैप्पी'

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