जिस देश को अपनी भाषा और अपने साहित्य के गौरव का अनुभव नहीं है, वह उन्नत नहीं हो सकता। - देशरत्न डॉ. राजेन्द्रप्रसाद।

Find Us On:

English Hindi
Loading
पहचान | लघु-कथा (कथा-कहानी) 
   
Author:कन्हैया लाल मिश्र 'प्रभाकर' | Kanhaiyalal Mishra 'Prabhakar'

'मैं अपना काम ठीक-ठाक करुंगा और उसका पूरा-पूरा फल पाऊंगा!'  यह एक ने कहा।

'मैं अपना काम ठीक-ठाक करुंगा और निश्चय ही भगवान उसका पूरा फल मुझे देंगे!'  यह दूसरे ने कहा।

'मैं अपना काम ठीक करुंगा। फल के बारे में सोचना मेरा काम नहीं।'  यह तीसरे ने कहा।

'मैं काम-काज और फल, दोनों के झमेले में नहीं पड़ता। जो होता है, सब ठीक है। जो होगा सब ठीक होगा।'  यह चौथे ने कहा।

आकाश सबकी सुन रहा था।  उसने कहा, 'पहला गृहस्थ है, दूसरा भक्त है, तीसरा ज्ञानी है, पर चौथा परमहंस है या अहदी (आलसी); यह मैं कह नहीं सकता!'

- कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर

#

 

Short Stories by Kanhaiyalal Mishra Prabhakar

कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर की लघु-कथाएं

Previous Page  | Index Page  |    Next Page

Comment using facebook

 
Post Comment
 
Name:
Email:
Content:
Type a word in English and press SPACE to transliterate.
Press CTRL+G to switch between English and the Hindi language.
 
 
 

सब्स्क्रिप्शन

इस अंक में

 

इस अंक की समग्र सामग्री पढ़ें

 

 

सम्पर्क करें

आपका नाम
ई-मेल
संदेश