कविता मानवता की उच्चतम अनुभूति की अभिव्यक्ति है। - हजारी प्रसाद द्विवेदी।

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खेल का खेल  (काव्य) 
   
Author:रोहित कुमार 'हैप्पी'

हार और जीत
भोगते हैं तीनों ही - अनाड़ी, जुगाड़ी और खिलाड़ी।
अनाड़ी को हारने पर
आती है शर्म।

जुगाड़ी
गुस्साता है,
लेकिन
खिलाड़ी हार से भी
कुछ नया
सीख जाता है;
इसलिए
हारकर भी जीत जाता है।

खेल हार-जीत में नहीं है
खेल ये है कि आप -
खेल खेलते हैं।

- रोहित कुमार 'हैप्पी'

 

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