साहित्य का स्रोत जनता का जीवन है। - गणेशशंकर विद्यार्थी।

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लक्षण  (काव्य) 
   
Author:अज्ञेय | Ajneya

आँसू से भरने पर आँखें
और चमकने लगती हैं।
सुरभित हो उठता समीर
जब कलियाँ झरने लगती हैं।

बढ़ जाता है सीमाओं से
जब तेरा यह मादक हास,
समझ तुरत जाता हूँ मैं--
'अब आया समय बिदा का पास।'

-अज्ञेय

 

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