भाषा का निर्माण सेक्रेटरियट में नहीं होता, भाषा गढ़ी जाती है जनता की जिह्वा पर। - रामवृक्ष बेनीपुरी।

Find Us On:

English Hindi
Loading
लेन-देन (काव्य) 
   
Author:शैल चतुर्वेदी | Shail Chaturwedi

एक महानुभाव हमारे घर आए
उनका हाल पूछा
तो आँसू भर लाए,
बोले--
"रिश्वत लेते पकड़े गए हैं
बहुत मनाया, नहीं माने
भ्रष्टाचार समिति वाले
अकड़ गए हैं।
सच कहता हूँ
मैनें नहीं माँगी थी
देने वाला ख़ुद दे रहा था
और पकड़ने वाले समझे
मैं ले रहा था।
अब आप ही बताइए
घर आई लक्ष्मी को
कौन ठुकराता है
क्या लेन-देन भी
रिश्वत कहलाता है?
मैनें भी उसका
एक काम किया था
एक सरकारी ठेका
उसके नाम किया था
उसका और हमारा लेन-देन
बरसों से है
और ये भ्रष्टाचार समिति तो
परसों से है।"

- शैल चतुर्वेदी
[ बाज़ार का ये हाल है, श्री हिन्दी साहित्य संसार ]

Previous Page  |  Index Page  |   Next Page

Comment using facebook

 
Post Comment
 
Name:
Email:
Content:
Type a word in English and press SPACE to transliterate.
Press CTRL+G to switch between English and the Hindi language.
 
 
 

सब्स्क्रिप्शन

Captcha Code

इस अंक में

 

इस अंक की समग्र सामग्री पढ़ें

 

 

सम्पर्क करें

आपका नाम
ई-मेल
संदेश