भाषा देश की एकता का प्रधान साधन है। - (आचार्य) चतुरसेन शास्त्री।

Find Us On:

English Hindi
Loading
इच्छाएं (काव्य) 
   
Author:शिवनारायण जौहरी विमल

दुबले पतंगी कागज़ का
उड़ता हुआ टुकड़ा नहीं
प्रसूती मन की
बलवती संतान हैं।

तन, बदन, रूप और
आकार कुछ होता नहीं
पिंजड़े से निकल भागें
फिर पकड़ कर बताए कोई
दिल पर राज करतीं हैं।

रंगीन तितली बैठती है
फूल फूल पर मेरे साथ
हम बात करते हैं
मधु कलश लेकिन
भर नहीं पाता कभी
प्यास बनी रहती है।

इच्छा की, तभी तो
पैर आगे बढ़ गया, वर्ना
पड़ा होता दक्षिणी
अफ्रीका की कंदराओं में
जंगली जानवर।

ले जाती है दोनों हाथ बांधे
दौड़ते अश्व के पीछे
किसी अपराधी की तरह।

डोज़र है जंगल पहाड़ों को
काट कर रास्ता बनाती।
विंध्याचल झुक जाता है
अगस्त मुनि को रास्ता देने।

नदी पर पुल, समुन्दर पर
जहाज बन जातीं हैं इच्छाएं
लिफ्ट हैं मंजिलें चढ़ने के लिए।
नई खोज नए
आविष्कार की जननी।
आकाश को फाड़ कर
दूसरा ब्रह्मांड खोजने
जाना चाहतीं हैं इच्छाएं।

-शिव नारायण विमल

Previous Page  |   Next Page

Comment using facebook

 
Post Comment
 
Name:
Email:
Content:
Type a word in English and press SPACE to transliterate.
Press CTRL+G to switch between English and the Hindi language.
 
 
 

सब्स्क्रिप्शन

Captcha Code

इस अंक में

 

इस अंक की समग्र सामग्री पढ़ें

 

 

सम्पर्क करें

आपका नाम
ई-मेल
संदेश