जब हम अपना जीवन, जननी हिंदी, मातृभाषा हिंदी के लिये समर्पण कर दे तब हम किसी के प्रेमी कहे जा सकते हैं। - सेठ गोविंददास।

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कुछ हाइकु (काव्य) 
   
Author:आनन्द विश्वास (Anand Vishvas)

1)
मन की बात
सोचो, समझो और
मनन करो।


2)
अपना घर
तन-मन-धन से
स्वच्छ बनाएं।


3)
पानी या खून
हर बूँद अमूल्य
मत बहाओ।


4)
गेंहूँ, जौ, चना
कैसे हो और घना
हमें सोचना।

-आनन्द विश्वास

 

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