जब हम अपना जीवन, जननी हिंदी, मातृभाषा हिंदी के लिये समर्पण कर दे तब हम किसी के प्रेमी कहे जा सकते हैं। - सेठ गोविंददास।

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बहरे या गहरे  (काव्य) 
   
Author:अशोक चक्रधर | Ashok Chakradhar

अचानक तुम्हारे पीछे
कोई कुत्ता भोंके,
तो क्या तुम रह सकते हो
बिना चोंके?

अगर रह सकते हो
तो या तो तुम बहरे हो,
या फिर बहुत गहरे हो!

- अशोक चक्रधर

[सोची-समझी, प्रतिभा प्रतिष्ठान, नई दिल्ली]

 

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