जो साहित्य केवल स्वप्नलोक की ओर ले जाये, वास्तविक जीवन को उपकृत करने में असमर्थ हो, वह नितांत महत्वहीन है। - (डॉ.) काशीप्रसाद जायसवाल।

Find Us On:

English Hindi
साही और साँप | शिक्षाप्रद कहानी (कथा-कहानी) 
   
Author:सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' | Suryakant Tripathi 'Nirala'

कड़ाके की सर्दी पड़ रही थी । एक साँप ने खुशामद पर आकर एक साही को अपने बिल में रहने की जगह दी । वह बिल एक छोटा-सा बिल था । उसमें घूमने-फिरने की काफी जगह न थी । साही के जरा हिलते ही उसके काँटे साँप के चुभते थे ।

साँप ने कहा, ''दोस्त, इस बिल में बहुत थोड़ी जगह है; दो इसमें मुश्किल से अट सकते हैं, तुम्हें बड़ी तकलीफ होती होगी? ''

आराम की आवाज में साही ने कहा, ''ऐसी हालत में जिसे रहने की दिक्कत हो उसे चला जाना चाहिए । मेरी पूछते हो, तो मैं बड़े आराम में हूँ । अगर तुम्हें आराम नहीं तो तुम जब चाहो, इस बिल को छोड़ जाओ ।''

यह कहकर उसने अपनी रीढ़ घुमायी और सांप को अपनी सूरत निकाल लेने को छोड़ दिया । वह उन आदमियों जैसी थी जो अपने मिले हुए हिस्से से ज्यादा लेने की ताक में रहते हैं ।

- सूर्यकांत त्रिपाठी निराला
[निराला की सीखभरी कहानियाँ]

 

यदि आप इन कहानियों को अपने किसी प्रकार के प्रकाशन (वेब साइट, ब्लॉग या पत्र-पत्रिका) में प्रकाशित करना चाहें तो कृपया मूल स्रोत का सम्मान करते हुए 'भारत-दर्शन' का उल्लेख अवश्य करें।

Previous Page  | Index Page  |    Next Page
 
 
Post Comment
 
Name:
Email:
Content:
Type a word in English and press SPACE to transliterate.
Press CTRL+G to switch between English and the Hindi language.
 
 
 

सब्स्क्रिप्शन

इस अंक में

 

इस अंक की समग्र सामग्री पढ़ें

 

 

सम्पर्क करें

आपका नाम
ई-मेल
संदेश