हिंदी का पौधा दक्षिणवालों ने त्याग से सींचा है। - शंकरराव कप्पीकेरी

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शहीद भगत सिंह (काव्य) 
   
Author:भारत-दर्शन संकलन | Collections

भारत के लिये तू हुआ बलिदान भगत सिंह ।
था तुझको मुल्को-कौम का अभिमान भगत सिंह ।।


वह दर्द तेरे दिल में वतन का समा गया ।
जिसके लिये तू हो गया कुर्बान भगत सिंह ।।


वह कौल तेरा और दिली आरजू तेरी ।
है हिन्द के हर कूचे में एलान भगत सिंह ।


फांसी पै चढ़के तूने जहां को दिखा दिया ।
हम क्यों न बने तेरे कदरदान भगत सिंह ।।


प्यारा न हो क्यों मादरे-भारत के दुलारे ।
था जानो-जिगर और मेरी शान भगत सिंह ।।


हरएक ने देखा तुझे हैरत की नजर से ।
हर दिल में तेरा हो गया स्थान भगत सिंह ।।


भूलेगा कयामत में भी हरगिज न ए 'किशोर' ।
माता को दिया सौंप दिलोजान भगत सिंह ।।

[ ब्रिटिश राज के प्रतिबंधित साहित्य से ]

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