जिस देश को अपनी भाषा और अपने साहित्य के गौरव का अनुभव नहीं है, वह उन्नत नहीं हो सकता। - देशरत्न डॉ. राजेन्द्रप्रसाद।

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हिन्दी ही अपने देश का गौरव है मान है (बाल-साहित्य ) 
   
Author:डा. राणा प्रताप सिंह गन्नौरी 'राणा'

पश्चिम की सभ्यता को तो अपना रहे हैं हम,
दूर अपनी सभ्यता से मगर जा रहे हैं हम ।

इस रोशनी में कुछ भी हमें सूझता नहीं,
आँखें खुली हुई है मगर दीखता नहीं ।

इंगलिश का बोलबाला किया चाहते हैं हम
जो कुछ न चाहिए था किया चाहते हैं हम ।

हिन्दी है आज हिन्दी-विरोधी बने हुए,
अपने ही पक्ष के है विपक्षी बने हुए ।

क्या जाने राष्ट्र-भावना अपनी मिटी है क्यों,
यह बात सब के दिल से उतर सी गयी है क्यों ?

बरतानिया नहीं है यह हिन्दोस्तान है ,
"हिन्दी ही अपने देश का गौरव है मान है ।"

-डॉ राणा प्रताप सिंह गन्नौरी 'राणा'

 

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