दक्षिण की हिंदी विरोधी नीति वास्तव में दक्षिण की नहीं, बल्कि कुछ अंग्रेजी भक्तों की नीति है। - के.सी. सारंगमठ

Find Us On:

English Hindi
छटपटाहट भरे कुछ नोट्स | सुशांत सुप्रिय की कविता (काव्य) 
   
Author:सुशांत सुप्रिय


                                   ( एक )

आज चारो ओर की बेचैनी से बेपरवाह
जो लम्बी ताने सो रहे हैं
वे सुखी हैं
जो छटपटा कर जाग रहे हैं
वे दुखी हैं

                                    ( दो )

आज हमारी बनाई इमारतें
कितनी ऊँची हो गई हैं
लेकिन हमारा अपना क़द
कितना घट गया है

                                    ( तीन )

आज विश्व एक
ग्लोबीय गाँव बन गया है
हमने स्पेस-शटल
बुलेट और शताब्दी रेलगाड़ियाँ बना ली हैं
एक जगह से दूसरी जगह की दूरी
कितनी कम हो गई है
लेकिन आदमी और आदमी के
बीच की दूरी
कितनी बढ़ गई है

                                      ( चार )

आज दीयों के उजाले
कितने धुँधले हो गए हैं
आज क़तार में खड़ा
आख़िरी आदमी
कितना अकेला है

                                     ( पाँच )

आज लम्बी-चौड़ी गाड़ियों में
घूम रहे हैं छोटे लोग
बड़े-बड़े बंगलों में
रह रहे हैं लघु-मानव
बौने लोग डालने लगे हैं
लम्बी परछाइयाँ



- सुशांत सुप्रिय
 मार्फ़त श्री एच.बी. सिन्हा
 5174 , श्यामलाल बिल्डिंग ,
 बसंत रोड,( निकट पहाड़गंज ) ,
 नई दिल्ली - 110055
मो: 9868511282 / 8512070086
ई-मेल : sushant1968@gmail.com

Previous Page  | Index Page  |    Next Page
 
 
Post Comment
 
Name:
Email:
Content:
Type a word in English and press SPACE to transliterate.
Press CTRL+G to switch between English and the Hindi language.
 
 
 

सब्स्क्रिप्शन

सर्वेक्षण

भारत-दर्शन का नया रूप-रंग आपको कैसा लगा?

अच्छा लगा
अच्छा नही लगा
पता नहीं
आप किस देश से हैं?

यहाँ क्लिक करके परिणाम देखें

इस अंक में

 

इस अंक की समग्र सामग्री पढ़ें

 

 

सम्पर्क करें

आपका नाम
ई-मेल
संदेश