मनुष्य सदा अपनी भातृभाषा में ही विचार करता है। - मुकुन्दस्वरूप वर्मा।

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ज़िंदगी (काव्य) 
   
Author:रोहित कुमार 'हैप्पी' | न्यूज़ीलैंड

लाचारी है,
बीमारी है,
...फिर भी
ज़िंदगी सभी को प्यारी है!

#

- रोहित
  संपादक, भारत-दर्शन
  न्यूज़ीलैंड


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