वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं। - मैथिलीशरण गुप्त।

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विपदाओं से रक्षा करो, यह न मेरी प्रार्थना | बाल-कविता  (बाल-साहित्य ) 
   
Author:रबीन्द्रनाथ टैगोर | Rabindranath Tagore

विपदाओं से रक्षा करो-
यह न मेरी प्रार्थना,
यह करो : विपद् में न हो भय।
दुख से व्यथित मन को मेरे
भले न हो सांत्वना,
यह करो : दुख पर मिले विजय।

मिल सके न यदि सहारा,
अपना बल न करे किनारा; -
क्षति ही क्षति मिले जगत् में
मिले केवल वंचना,
मन में जगत् में न लगे क्षय।

करो तुम्हीं त्राण मेरा-
यह न मेरी प्रार्थना,
तरण शक्ति रहे अनामय।
भार भले कम न करो,
भले न दो सांत्वना,
यह करो : ढो सकूँ भार-वय।
सिर नवाकर झेलूँगा सुख,
पहचानूँगा तुम्हारा मुख,
मगर दुख-निशा में सारा
जग करे जब वंचना,
यह करो : तुममें न हो संशय।

- रवीन्द्रनाथ ठाकुर

[अनुवाद - युगजीत नवलपुरी]

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Children's Literature by Rabindranath Tagore

Ravindranath Ka Bal Sahitya: A selection of Rabindranath Tagore's writings for children.
(रवीन्द्रनाथ का बाल साहित्य)

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