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समय के झरोखे से बालेश्वर अग्रवाल  (विविध) 
   
Author:बालेश्वर अग्रवाल

17 जुलाई 1921 को उड़ीसा के बालासोर (बालेश्वर) नगर में बालेश्वर अग्रवाल का जन्म हुआ।

1939 में मैट्रिकुलेशन परीक्षा पास की।

1945 से 1948 तक डालमिया नगर (बिहार) में इंजीनियर के पद पर नियुक्त रहे।

1948 में संघ के सत्याग्रह के अवसर पर भूमिगत।

1948 में संघ पर प्रतिबंध लगने पर उन्हें गिरफ्तार।

1949 में बी.एससी इंजीनियरिंग की परीक्षा उर्त्तीण की।

1951 में भारतीय भाषाओं में समाचार देने वाली ‘हिन्दुस्थान समाचार' नामक संवाद संस्था के संस्थापक सदस्य।

1954 में देवनागरी में टेलीप्रिंटर सेवा की शुरुआत।

1956 से 1982 तक ‘हिन्दुस्थान समाचार'के प्रधान सम्पादक व महा प्रबंधक।

1978 में अन्तरराष्ट्रीय सहयोग परिषद की स्थापना की।

1982 में राजनीतिक कारणों से, हिन्दुस्थान समाचार के कर्मचारियों में आपसी मतभेद पैदा हो गया और हिन्दुस्थान समाचार छोड़ दिया।

1997 में बालेश्वर जी के नेतृत्व में अन्तरराष्ट्रीय सहयोग परिषद दल न्यूज़ीलैंड के दौरे पर आया था।

1998 में उन्होंने विदेशों में बसे भारतवंशी सांसदों का सम्मेलन किया।

2000 में ‘प्रवासी भारतीय सम्मेलन' किया।

09 जनवरी, 2003 को बालेश्वर जी की प्रेरणा से तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने अप्रवासी भारतीय सम्मेलन किया।

14 दिसम्बर, 2003 को प्रवासी भवन का शिलान्यास भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने किया।

28 फरवरी 2009 को माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय द्वारा डी.लिट् की मानद उपाधि।

1 दिसम्बर, 2009 को 'प्रवासी भवन' का उद्घाटन मॉरीशस के राष्ट्रपति सर अनिरुद्ध जगन्नाथ ने किया।

23 मई, 2013 को बालेश्वर जी का निधन हो गया।

17 जुलाई 2014 को अंतरराष्ट्रीय सहयोग परिषद ने एसवी बालेश्वर अग्रवाल स्मृति व्याख्यानमाला का आयोजन किया।

2018 (अगस्त) में भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और मॉरीशस की शिक्षा मंत्री लीला देवी दूकन ने विश्व हिंदी सचिवालय के अंतर्गत ग्रंथालय को श्री बालेश्वर अग्रवाल के नाम समर्पित किया।

21 से 23 जनवरी 2019 तक वाराणसी में आयोजित 'प्रवासी भारतीय दिवस' के अवसर पर स्व बालेश्वर अग्रवाल की स्मृति में 'श्री बालेश्वर अग्रवाल नगर' बनाया गया।

संकलन :  रोहित कुमार 'हैप्पी'
[भारत-दर्शन समाचार] 

Posted By harendra holkar   on Sunday, 05-Jul-2020-09:36
Baut acchee story he sir jindaki ke badde baat assane se khana ka tareeka
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