राष्ट्रभाषा के बिना आजादी बेकार है। - अवनींद्रकुमार विद्यालंकार।

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दो क्षणिकाएं  (काव्य) 
   
Author:रोहित कुमार 'हैप्पी' | न्यूज़ीलैंड

कवि 

तुम्हारी कलम में
वो 'पीर' नहीं। 
तुमने शब्द गढ़े,
जीये नहीं।
तुम कवि तो हुए
कबीर नहीं! 

- रोहित कुमार 'हैप्पी'

 

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स्पष्टीकरण 

हाँ, मैंने कहा था--
अच्छे दिन आएँगे। 
कब कहा था, लेकिन --
तुम्हारे? 

- रोहित कुमार 'हैप्पी'

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