विदेशी भाषा का किसी स्वतंत्र राष्ट्र के राजकाज और शिक्षा की भाषा होना सांस्कृतिक दासता है। - वाल्टर चेनिंग

Find Us On:

English Hindi
जयप्रकाश मानस की दो बाल-कविताएं (बाल-साहित्य ) 
   
Author:जयप्रकाश मानस | Jaiprakash Manas

एक बनेंगे

हम हैं बच्चे
मन के सच्चे
आगे कदम बढ़ाएंगे,
भूले भटके
राह में अटके
सबको राह दिखाएंगे
नहीं लड़ेंगे
एक बनेंगे
मिलकर 'जन गण' गाएंगे
नहीं डरेंगे
टूट पड़ेंगे
न संकट से घबराएंगे।

-जयप्रकाश मानस


#


गिनकर तो दिखाओ

खेत-खार में कितने मेड़
इस जंगल में कितने पेड़
ठीक-ठीक बताओ
गिनकर तो दिखाओ।

सूरज में हैं कितनी किरने
हैं धरती में कितने झरने
पता जरा लगाओ
गिनकर तो दिखाओ।।

कितने तारे आसमान में
खेल कितने इस जहान में
चलो-चलो सुनाओ
गिनकर तो दिखाओ।।

-जयप्रकाश मानस
[जयप्रकाश मानस की बाल कविताएं, यश पब्लिशर्स एंड डिस्ट्रीब्यूटर्स दिल्ली]

Previous Page  | Index Page  |    Next Page
 
 
Post Comment
 
Name:
Email:
Content:
Type a word in English and press SPACE to transliterate.
Press CTRL+G to switch between English and the Hindi language.
 
 
 

सब्स्क्रिप्शन

इस अंक में

 

इस अंक की समग्र सामग्री पढ़ें

 

 

सम्पर्क करें

आपका नाम
ई-मेल
संदेश