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रे रंग डारि दियो राधा पर (काव्य)

Author: शिवदीन राम

रे रंग डारि दियो राधा पर, प्यारा प्रेमी कृष्ण गोपाल |
तन मन भीगा अंग-अंग भीगा, राधा हुई निहाल || रे...
गोप्या रंग रंगीली रंग में, ग्वाल सखा कान्हा के संग में |
चंग बजावे रसिया गावे, गांवें राग धमाल || रे....
श्यामा श्याम यमुन तट साजे, मधुर अनुपम बाजा बाजे |
रंग भरी पिचकारी मारे, हँसे सभी ब्रिजबाल || रे...
मोर मुकुट पीताम्बर वारा, निरखे गोप्यां रूप तिहारा |
राधा कृष्ण मनोहर जोरी, काटत जग जंजाल || रे...
शिवदीन रंगमय बादल छाया, मनमोहन प्रभू रंग रचाया |
गुण गावां, गावां गुण कृष्णा, मोहे बरषाने ले चाल || रे...

-शिवदीन राम

 

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